*यशपाल शर्मा
मेरा पहला विचार तो यह है कि आज राजनीति में अच्छे राजनीतिज्ञों और अच्छी सोच के व्यक्तियों की बहुत जरूरत है। क्योंकि नब्बे फीसदी राजनीतिज्ञ स्वार्थी हो चुके हैं। उन्हें कोई मतलब नहीं किसी विचारधारा से, उन्हें कोई मतलब नहीं है वो इस दर्शन या इस फिलॉस्फी को फॉलो करते हैं। कोई प्रिरचुअल नहीं है, कोई मानवता की बात नहीं करता है। चुनावों में तो खासकर सब नंगे हो जाते हैं।
मुझे ऐसा लगता है कोई भी अच्छा इंसान, चाहे वो अभिनेता हो या किसी और दूसरे क्षेत्र से हो, अगर राजनीति में जाएगा तो कुछ तो अच्छा काम करने की कोशिश करेगा। मुझे मालूम है, संसद में जाकर वो पूरे सिस्टम को तो चेंज नहीं कर पाएगा। सिस्टम को बदलना इतना आसान काम नहीं है। उसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़ेगी। लेकिन कुछ तो अच्छी शुरुआत करेगा। मुझे बड़े दु:ख के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारे ज्यादातर अभिनेताओं ने राजनीति में जाकर नाक कटवाई है। उन्होंने जनता के लिए कोई काम नहीं किया। चाहे वो हेमा मालिनी हों, चाहे कितने ही और बड़े-बड़े लोग हों। वे अपने ही कामों में बिजी रहे हैं। फिल्मों में बिजी रहे हैं। आप किसी संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़कर आए हैं तो आपको जाना चाहिए अपने क्षेत्र के लोगों के बीच। जिस संसदीय क्षेत्र को रिप्रजेंट करते हैं वहां की जनता की परेशानियों-दु:ख-दर्द और उनके बुनियादी सवालों को लेकर संसद में बहस करनी चाहिए। अपने संसदीय क्षेत्र में जाकर जनता की समस्याओं को सुनना चाहिए। अपने एरिया के लोगों से बात करनी चाहिए। बगैर जनता के बीच जाए आप कैसे बनेंगे एक अच्छे लीडर। कैसे समझेंगे जनता के सवालों को, उनकी समस्याओं को। और किस तरह आपकी ग्रोथ होगी राजनीति में।
मुझे शर्म आ रही है अपने ही बीच के लोगों के रवैए को लेकर। उनकी विचारशून्यता को लेकर और उनके किसी प्रकार के कोई सामाजिक सरोकार न होने को लेकर। सिनेमा के क्षेत्र में ऐसे बहुत कम लोग रहे हैं जिनका नाम मैं फख्र से ले सकूं, खासकर नई पीढ़ी में। पुरानी पीढ़ी में मैं सुनील दत्त साहब का नाम ले सकता हूं। उन्होंने राजनीति में जाकर काफी काम किया जनता के लिए। जया बच्चन जी का नाम लूंगा। उन्होंने राजनीति में जाकर बहुत अच्छी बातें कहीं हैं। जनता के बुनियादी सवालों को सदन में उठाया है और कुछ काम करने की कोशिश की है। लेकिन नई पीढ़ी में, मैं किसका नाम लूं। मुझे एक भी ऐसा नाम याद नहीं आ रहा जिन्होंने राजनीति में जाकर समाज के लिए कोई काम किया हो। नई पीढ़ी के तो कोई सामाजिक सरोकार भी मुझे नजर नहीं आते। एक भी ऐसा व्यक्ति नहीं नजर आता जो राजनीति में गया हो और उसने अपने क्षेत्र की जनता के लिए कोई काम किया हो। या संसद या विधानसभा में जाकर वह जनता की बुनियादी समस्याओं को लेकर लड़ा-भिड़ा हो।
अरे भाई, आपको जनता ने वोट देकर अपना प्रतिनिधि बनाया है तो आपकी ड्यूटी है कि आप अपने क्षेत्र की जनता की बिजली-पानी और सड़क की समस्या के लिए, उनके रोजगार के लिए संसद में जाकर बहस करें। उनकी जो बेसिक समस्याएं हैं, चाहे वो भूख की हो, खाने की हो या उनकी कोई और बुनियादी समस्या हो उन सब चीजों के लिए संसद में आवाज बुलंद करें। ये सारे काम अभिनेता नहीं करते। क्योंकि उनके पास टाइम ही नहीं है इन सब कामों को करने के लिए। उनके पास टाइम नहीं है अपने एरिया में घूमने का। इन समस्याओं को दूर करने का। राजनीति इस तरह थोड़ी होती है। राजनीति का मतलब है जनसेवा। ये नहीं कि पांच साल में चले गए एक बार खेत में और महिलाओं के साथ फोटो खिंचवा लिया। फिर पांच साल बाद खेत में जाकर उनके साथ फोटो खिंचवा लिया। ये तो जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ है। लानत है ऐसी सोच पर। आपको राजनीति का ककहरा भी मालूम नहीं है। राजनीति कोई मौज-मस्ती के लिए नहीं है। अगर जनसेवा नहीं कर सकते तो फिर मत जाइए वहां। कोई अच्छा व्यक्ति जाएगा वहां। कुछ तो अच्छे काम करेगा वो अपने क्षेत्र की समस्याओं को दूर करने के लिए।
हमारे यहां से एक बड़े क्षेत्र से रवि किशन जी सांसद हैं। लेकिन वो लगातार फिल्में कर रहे हैं। करते जा रहे हैं। मैं कहता हूं जब आपको फिल्में ही करनी हैं तो क्यों राजनीति में गए हैं भाई। वही काम करिए जो आपका है। चुनाव क्यों लड़ा आपने। चुनाव लड़ते वक्त कुछ तो अपने क्षेत्र की जनता से वायदे किए होंगे आपने? क्या हुआ उन वायदों का। जिस एरिया को आप रिप्रजेंट करते हैं क्या एक भी बार आप गए हैं वहां। अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याएं सुनिए भाई। उनसे जो वायदे आपने किए थे उन्हें पूरा करने के लिए कुछ तो कीजिए संसद में।
मैं नहीं कहता कि आप फिल्में मत कीजिए। पर आपको लोगों ने वोट देकर संसद में भेजा है भाई। वहां जाकर आप क्या कर रहे हैं उन लोगों के लिए। आप अगर जनता के बीच नहीं जाते तो आपके व्यक्तित्व का विकास नहीं हो सकता। आपकी राजनीतिक ग्रोथ होने का तो सवाल ही नहीं उठता। आपको सीखना चाहिए अपने वरिष्ठ लोगों से, अनुभवी लोगों से कि वे लोग क्या बात कर रहे हैं आपके ही चुनाव क्षेत्र के बारे में। राजनीति का मतलब कोई ऐशो-आराम नहीं है भाई, बल्कि समाज सेवा है, जनसेवा है।
कभी जब मैं विश्लेषण करता हूं उन फिल्मी सितारों का जो राजनीति में गए हैं तो सिर्फ एक नाम मेरे दिलो-दिमाग में जम सा जाता है। वे थे सुनील दत्त। दत्त साहब की तो लोग आज भी मिसाल देते हैं। इतना बड़ा स्टार, इतना बड़ा हीरो, धन की कोई कमी नहीं थी उनके पास। पर कितनी मिसनसारिता थी उनमे। पूरा फिल्मजगत और आम लोग कायल हैं सामाजिक कामों के प्रति उनकी निष्ठा के। कैंसर रोगियों के लिए कितना काम किया उन्होंने। हिन्दुस्तानी सिनेमा के अकेले ऐसे आदर्शपुरुष थे, जिन्होंने नेता शब्द के सही मायने राजनेताओं को बताए। नेताओं के प्रति जनता की जो गलत सोच बन गई थी उस दौर में, उसे उन्होंने राजनीति में अच्छे काम करके बदला। नेता होने का मतलब समझाया। मैं समझता हूं नई पीढ़ी के जो लोग आज आ रहे हैं राजनीति में मलाई खाने के लिए, नाम कमाने के लिए या सिर्फ पैसा कमाने के लिए, उन्हें सुनील दत्त साहब से प्रेरणा लेनी चाहिए। लोगों के बीच जाकर काम करें। अगर दत्त साहब की शख्सियत का दस फीसदी भी ले लें तो उनकी जिन्दगी बदल जाएगी। दत्त साहब राजनेताओं के लिए भी एक मिसाल हैं।
“(लेखक प्रसिद्ध अभिनेता और फिल्ममेकर हैं। वरिष्ठ फिल्म पत्रकार दीप भट्ट से बातचीत पर आधारित।)
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