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क्या अल्लू अर्जुन से बड़ा हो गया पुष्पा…? डायरेक्टर रामगोपाल वर्मा ने लिखी रिव्यू

Pushpa 2 Allu Arjun

चर्चा में पुष्पा 2: द रुल

अल्लू अर्जुन और रश्मिका मंदाना अभिनीत Pushpa 2 : The Rule की चर्चा सबकी जुबान पर है। अल्लू अर्जुन की एक्टिंग और उसके इमोशन भरे एक्शन सीन ने देश-विदेश में दर्शकों को दीवाना बना रखा है। यहां तक कि मशहूर फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा भी पुष्पा टू की रिव्यू लिखने से खुद को रोक नहीं सके। उन्होंने यह रिव्यू सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अंग्रेजी में लिखी है, जिसका हिंदी भावानुवाद इस प्रकार है।

यह अपने आपमें बेहद दुर्लभ है कि भारतीय फिल्में इतने तीखे किरदारों को प्रस्तुत करती हैं। लेकिन इससे भी दुर्लभ बात तो ये है कि एक स्टार अपनी जानी पहचानी इमेज को भुला बैठे और पूरी तरह से किसी कैरेक्टर को अपना ले। पुष्पा जैसे किरदार को देखना इन्हीं दुर्लभ मौकों में से एक है।

अब एक दर्शक के रूप में मुझे यकीन हो गया है कि पुष्पा जैसा किरदार वास्तव में हो सकता है। जाहिर है यह कोई आसान उपलब्धि नहीं। खास बात ये कि यह किरदार एक बहुत ही कमर्शियल मेनस्ट्रीम के ढांचे में बुना गया है, जो अपनी परिभाषा के दायरे में है लेकिन यह उतना ही वास्तविक भी लगता है।

पुष्पा ऐसा कैरेक्टर है जिसमें कई विरोधाभास हैं। जैसे कि वह बहुत मासूम दिखता है और बहुत क्रूर चालाक भी। वह सुपर ईगो से लैस है तो उसकी कई कमजोरियां भी हैं।

मैंने कभी नहीं सोचा था कि मानसिक तौर पर ऐसा व्यक्ति भी एक सुपर एक्शन हीरो हो सकता है, क्योंकि आमतौर पर एक सुपर हीरो से परिपूर्ण होने की उम्मीद की जाती है। लेकिन पुष्पा के किरदार में अल्लू अर्जुन ने इसे इतनी ताकत और मजबूती से ढाल दिया, जो पहले कभी नहीं देखा गया। अब दर्शकों के दिलों दिमाग में उसकी बॉडी लैंग्वेज और हाव-भाव की छाप दशकों तक बनी रहेगी।

यह बहुत आसान है कि कोई भी एक्टर ऐसे सीन में ओवर द टॉप लग सकता है लेकिन अल्लू अर्जुन ने इसे इतनी सहजता से निभाया है कि कई असहज से सीन भी सहज लगते हैं। यहां सहजता और असहजता दोनों का अनोखा मिश्रण है। यहां यह बताना मुश्किल हो जाता है कि किरदार फिल्म को जन्म दे रहा है या फिल्म किरदार को जन्म दे रही है।

अल्लू अर्जुन की परफॉर्मेंस की तल्लीनता केवल उनकी बॉडी लैंग्वेज तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उसकी एक्टिंग में भी है जो गहरी भावनाओं तक उतर जाती है। मसलन फिल्म में सीएम द्वारा उसके साथ फोटो खिंचवाने से इनकार करना हो या सॉरी कहने वाला सीन- उसे गहरी चोट पहुंचती है, यहां उसने बहुत ही जीवंत एक्टिंग की है।

पुष्पा के किरदार के जरिये इस फिल्म का भरपूर आनंद उठाने के बाद यह कहने में खेद हो रहा है कि असली अल्लू अर्जुन कहीं पुष्पा से छोटा न पड़ जाए।

आपको यह फिल्म कैसी लगी और राम गोपाल वर्मा की टिप्पणी कैसी लगी, कॉमेंट बॉक्स में जरूर लिखिएगा।

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