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राजनीति में फिल्मी सितारों से उम्मीद ही क्या करें… डॉ. अचला नागर

Achala Nagar

डॉ. अचला नागर

जहां तक मुझे याद आता है हमारे समय की महान अभिनेत्री नरगिस जी पहली ऐसी अदाकारा थीं जो राज्यसभा पहुंची थीं। नेहरू परिवार से उनके गहरे संबंध थे। उन्होंने सुनील दत्त के साथ मिलकर भी समाज सेवा के बहुत सारे काम किए थे। वे बहुत सोशल वर्क करती थीं। दत्त साहब का क्या था कि वे राजनीति और समाज सेवा में पूरी तरह रम गए थे। जया बच्चन भी लगातार राजनीति में सक्रिय हैं। उन्हें भी राजनीति करते हुए लंबा अरसा हो गया है। लेकिन नई पीढ़ी में धर्मेन्द्र के सुपुत्र सनी देओल को लें। मुझे लगता है फिल्मी सितारे सियासत में चले तो जाते हैं पर सिर्फ उनका काम केवल हाजिरी लगाने का होता है, कोई समाजसेवा तो करते नहीं। जनता से रिश्ता तो बनाकर रखते नहीं। राजनीतिक दल फिल्मी सितारों को इसलिए प्रेरित करते हैं क्योंकि उन्हें लगता है ग्लैमर से उनका नाता है, उनकी लोकप्रियता है। अगर वे राजनीति में आ जाएं तो उससे उनकी पार्टी को भला हो जाएगा। क्योंकि ग्लैमर का अपना एक आभामंडल होता है, आकर्षण होता है।

सितारों का क्या है कि चुनाव जीतकर आने के बाद भी समाज की समस्याओं से उनका कोई सरोकार नहीं रहता। अपने लंबे फिल्मी सफर में मुझे सुनील दत्त साहब जैसा एक भी व्यक्ति नहीं मिला, जिसने समाज में जाकर इतना काम किया हो। वे मिसाल हैं सियासत में जाकर काम करने वालों के बीच। समाज में जाकर इतना सीरियसली किसी ने भी काम नहीं किया। शत्रुघ्न सिन्हा जी बिहार से आए सियासत में। उन्होंने भी काफी काम किया है। लेकिन राजेश खन्ना ने कोई काम नहीं किया सियासत में आने के बाद। आप सितारों से ही उम्मीद क्यों करते हैं। जो सामान्य लोग भी राजनीति में जाते हैं जनता का वोट लेकर, वो संसद में जाकर कितना काम करते हैं समाज के लिए। वे तो यह भी नहीं सोचते कि चलिए जनता ने हमें वोट देकर जिताया है तो उसके लिए कुछ काम किया जाए।

फिल्म वालों को राजनीति में घसीटा जाता है। राजनीति में ही क्यों हर चीज में घसीटा जाता है। क्यों, क्योंकि उनकी शोहरत होती है। बाकी लोग क्या करते हैं जनता के लिए। जनता तो उसी को नेता मानती है जो उनके लिए काम करे। तो जनता के लिए तो फिल्मजगत से एकमात्र सुनील दत्त साहब हैं जो सियासत में जाकर उनके लिए काम करते रहे। मेरी खुद की नजर में भी एकमात्र सुनील दत्त हैं जो सियासत में रहने के बाद एक पल के लिए भी खाली नहीं बैठे रहे। जनता के लिए कुछ न कुछ करते रहे।

(हिंदी की प्रसिद्ध लेखिका डॉ. अचला नागर निकाह, बागवां आदि कई फिल्में लिख चुकी हैं। वरिष्ठ फिल्म पत्रकार दीप भट्ट से बातचीत पर आधारित।) 

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