सिनेमा और भारत रत्न: बहस ; भाग-एक
-अजय ब्रह्मात्मज*
(‘भारत रत्न’ सम्मान के संदर्भ में हमारी सरकारों का ध्यान सिने जगत की हस्तियों की ओर क्यों नहीं जाता? इसकी क्या वजह है? इस मुद्दे पर पिक्चर प्लस पत्रिका ने नवंबर-दिसंबर-2024 का विशेष अंक प्रकाशित किया। बहस में शामिल प्रसिद्ध कलाकारों और नामी लेखकों के लेखों व टिप्पणियों को हम यहां क्रमवार तरीके से प्रकाशित कर रहे हैं। यहां पढ़ें देश के जाने-माने फिल्म समीक्षक, लेखक, अनुवादक और सिनेमाहौल इजिन के संपादक अजय ब्रह्मात्मज की राय। पिक्चर प्लस पत्रिका ऑनलाइन पढ़ने के लिए क्लिक करें।)
भारत रत्न भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। कला, साहित्य, विज्ञान, सार्वजनिक सेवा और खेल के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान करने वालों को यह नागरिक सम्मान दिया जाता है। इस सम्मान की स्थापना 2 जनवरी 1954 को हुई थी। अभी तक 53 गणमान्य नागरिकों को यह सम्मान दिया जा चुका है। इन 53 नागरिकों में से अधिकांश राजनीतिज्ञ हैं। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर पीवी नरसिम्हा राव तक सभी प्रधानमंत्री को यह सम्मान दिया जा चुका है। आने वाले वर्षों में निश्चित ही मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी भी इसे सम्मानित हो जाएंगे। खेल के लिए क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर को 2014 में दिया गया। खान अब्दुल गफ्फार खान, नेल्सन मंडेला और मदर टेरेसा को भी यह सम्मान दिया गया है। भारतीय सिनेमा से जुड़ी हस्तियों में सत्यजित राय, लता मंगेशकर और भूपेन हजारिका को यह सम्मान मिल चुका है।
कला, साहित्य और जीवन के सभी क्षेत्रों में योगदान कर चुके नागरिकों को यह सम्मान दिया जा सकता है। 2011 में संशोधन कर इसमें सभी क्षेत्रों को शामिल किया गया। फिर भी पूरी सूची देखने पर आप पाएंगे कि इसमें कला और साहित्य जैसे क्षेत्रों से चंद मशहूर व्यक्तियों को ही यह सम्मान मिला है। सिनेमा, संगीत, नाटक और अन्य कला माध्यमों में सक्रिय व्यक्तियों को भी यह सम्मान मिलना चाहिए। फिल्मी हस्तियों को सम्मान ना देने का एक तर्क यह हो सकता है कि उनके लिए दादा साहेब फाल्के जैसा विशिष्ट सम्मान है। फिर भी मुझे लगता है कि देश की तमाम भाषाओं में जीवनपर्यंत योगदान कर रहे/चुके सभी महत्वपूर्ण हस्तियों के नाम पर विचार करना चाहिए। भारतीय सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में सिनेमा का आंतरिक योगदान है। यह सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं है। सिनेमा के जरिए दर्शक अपने समाज और संस्कृति से परिचित होते हैं।
फिल्मी हस्तियां (निर्माता, निर्देशक, कलाकार और तकनीशियन) अपने-अपने तई निजी प्रतिभा के अनुपात में योगदान करती हैं। मुझे लगता है कि उनके इस योगदान को रेखांकित करते हुए उन्हें सम्मानित किया जाना चाहिए। सिर्फ हिंदी सिनेमा की ही बात करें तो फिलहाल श्याम बेनेगल, गुलजार, अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र को यह सम्मान दिया जा सकता है। ये सभी इस सम्मान के योग्य हैं। इनका महत्व अपने समकालीन राजनीतिज्ञों से कम नहीं है। अभी तक इस दिशा में सकारात्मक तरीके से सोचा नहीं गया है। सत्ता की गलियारे में अगर इस संदर्भ में मंथन और विमर्श आरंभ हो तो बहुत अच्छी बात होगी। फिल्मी हस्तियों को भी सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलना चाहिए।• (पिक्चर प्लस, नवंबर-दिसंबर-2024 में प्रकाशित।)
*(लेखक प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक, अनुवादक और यूट्यूबर हैं। सिनेमा पर कई पुस्तकें लिखी हैं। मुंबई में निवास।
संपर्क–urgenthaikya@gmail.com/cinemahaul@gmail.com / https://youtube.com/@ CineMahaul)
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