यहां आलमज़ेब (शर्मिन सहगल), एक महत्वाकांक्षी कवयित्री है। उसके संवाद छंदों की तरह खुलते हैं। जिसमें चंचलतापूर्वक आवेग है। वह कहती है- “मैं तुम्हें नाश्ते में दोहे और दोपहर के भोजन में कविताएं परोसूंगी।” आलमज़ेब मल्लिकाजान (मनीषा कोइराला) की छोटी बेटी है, जिसका हीरामंडी में शासन है।
हिंदी फिल्मों के मशहूर गीतकार और जनकवि शैलेंद्र की जन्म शताब्दी के मौके पर उनकी बेटी अमला शैलेंद्र मजूमदार से पिक्चर प्लस संपादक संजीव श्रीवास्तव ने खास बातचीत की। प्रस्तुत है उस बातचीत के प्रमुख अंश।