Thursday, April 3, 2025

कला, सिने समीक्षा एवं फिल्म रसास्वादन की… पुस्तक मेले में विनोद तिवारी की पुस्तक का लोकार्पण

नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले के अंतिम दिन (9 फरवरी, 2025) प्रख्यात लेखक, फिल्म समालोचक और फिल्म पत्रिका 'माधुरी' के पूर्व संपादक विनोद तिवारी...

रिव्यूज

वेब सीरीज

मनोज बाजपेई की क्राइम थ्रिलर डिस्पैच… कॉरपोरेट-राजनीति के आपराधिक गठजोड़ की पड़ताल

-अजित राय पिछले अक्टूबर में आयोजित मुंबई फिल्म फेस्टिवल मामी में मनोज बाजपेई और युवा निर्देशक कनु बहल की फिल्म 'डिस्पैच' के वर्ल्ड प्रीमियर की...

पंचायत, गुल्लक, एस्पिरेंट्स पर दर्शकों ने क्यों लुटाया इतना प्यार… बता रहे हैं डायरेक्टर अपूर्व कार्की

अगर आप आज के सिनेमा का विश्लेषण करेंगे या उसे व्याख्यायित करने की कोशिश करेंगे तो आपको एक बात निश्चित तौर पर महसूस होगी...

द लास्ट मील : शहीद भगत सिंह के आखिरी पलों की भावुक कहानी

[caption id="attachment_326" align="alignright" width="150"] राघवेन्द्र रावत*[/caption]

जिन हीरामंडी नहीं देख्या… वो सिनेमा प्रेमी ही क्या…! चालीस के दशक के लाहौर की वो कहानी…

यहां आलमज़ेब (शर्मिन सहगल), एक महत्वाकांक्षी कवयित्री है। उसके संवाद छंदों की तरह खुलते हैं। जिसमें चंचलतापूर्वक आवेग है। वह कहती है- “मैं तुम्हें नाश्ते में दोहे और दोपहर के भोजन में कविताएं परोसूंगी।” आलमज़ेब मल्लिकाजान (मनीषा कोइराला) की छोटी बेटी है, जिसका हीरामंडी में शासन है।

डायलॉग

लीजेंडरी एक्टर पृथ्वीराज कपूर ने संसद में निभाई थी बड़ी जिम्मेदारी

देश में आजादी मिलने और संविधान के लागू होने...

संसद को फिल्मी कलाकार सीरियसली लें…पिक्चर प्लस से बोले डायरेक्टर सुधीर मिश्रा

मैंने अपने लंबे सिनेमाई सफर में राजनीतिक फिल्में भी...

राजनीति क्या है… आज के फिल्मी सितारे सुनील दत्त की शख्सियत से सीखें

*यशपाल शर्मा मेरा पहला विचार तो यह है कि आज...

शैलेंद्र को अपने लोगों ने ही दिया धोखा, उसी से उनकी मौत हुई… बेटी अमला ने किया खुलासा

हिंदी फिल्मों के मशहूर गीतकार और जनकवि शैलेंद्र की जन्म शताब्दी के मौके पर उनकी बेटी अमला शैलेंद्र मजूमदार से पिक्चर प्लस संपादक संजीव श्रीवास्तव ने खास बातचीत की। प्रस्तुत है उस बातचीत के प्रमुख अंश।

सिनेमा स्कोप

ग्लोबल स्क्रीन

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